महाराष्ट्र राज्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण सभा

स्थापना से आजतक एक सिंहावलोकन |

आनेवाले १५ अगस्त को महाराष्ट्र राज्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण सभा अपने कार्यकाल के ४० वर्ष पूर्ण करने जा रही है। इस पदातिक्रमण में सभा के (६) अधिवेशन सम्पन्न हो चुके है और यह स्मरणिका आपके हाथ में पहुंचेगी तय पहेली सर्वसाधारण सभा पूर्ण होने जा रह । इन चार दशकों में सभा ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सामाजिक उत्थान का अग्रेसर करने के लिये पथ संवर्धन का कार्य किया है। सभा ने आने दशक के अंतिम चरण में पथ को सुप बनाने का सफलतम प्रयास किया है। नये आयाम जी है। अमित इतिहास होता है और वर्तमान नियति । अतित के आल्हाददायक क्षणों की अनुभुति तथा वर्तमान की स्वनिर्मिती अर्थात भूत एवं वर्तमान का योग प्रकाशमान भविष्य निर्माण करता है । इस चार दशक की पूर्णता में अतित के सुनहरे पलों को ना सभास्थापना के अनुठे क्षणों को स्मरण करना एक आल्हाददायक अनुभव होगा।

Bhramhan sabha malegaon adhiveshan
महाराष्ट्र राज्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण सभा मालेगांव अधिवेशन दि. १३, १४, १५ ऑगस्ट १९६६ के समय का समाज दर्शन

स्वातंत्र्योत्तर काल में सारे भारत वर्ष में नव चैतन्य धारा प्रवाह बढने लगा लोगो में ‘स्व’ भाव उभरने लगा स्वदेशी चिंतन उभर कर सामने आने लगा, सभी धर्मिय, पंथिय लोग अपने अपने धर्म संस्कारों को पल्लवित करते हुये सभी जनों में समाहित होने लगे सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र में विशेषकर समाज में व्याप्त रुढी-परंपराओं एवं अंधविश्वास पर प्रहार होने लगा तथा शिक्षा का प्रसार और प्रचार होने लगा अर्थात सामाजिक परिवर्तन का दौर शुरु हुआ। सभी समाज अपने अपने स्तर पर सामाजिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने हेतु सामाजिक संघटनों की निर्मिती करने लगे ।

महाराष्ट्र राज्य स्थित विद्वत शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज में भी स्वजाती उत्थान एवं उन्नति के लिये हलचल बढने लगी। मुंवअ का “बन्धू” परिवार तो पत्रिका एवं साहित्य के माध्यम से लोक जागरण कार्य में पहले ही से रत था। इसी दौरान सन १९६५ में नगर जिला निवासी अपने बाम्बोरी स्थित क्षेत्रिय बगिची स्थान-सामाजिक संपत्ती का ट्रस्ट निर्मिती कर उत्पन्न आमदनी से नगर जिला समाज संघटन का संवर्धन करना चाहते थे इसी उहा-पोह में महाराष्ट्र राज्य स्थित शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज अधिवेशन की योजना का प्रारुप तय्यार हुआ श्रीमान कन्हैय्यालालजी जेठमलजी, श्रीमान मिसरीलालजी

तथा श्रीमान हरिकिसनी नगरवालो इन त्रिरत्नों ने त्रिदिवसिय जनसभा आयोजन एवं नियोजन की जवाबदारी स्विकार कर उसे सफल भी किया । यह त्रिदिवसिय दि. २७-२८-२९ अगस्त १९६५ को प्रथम अनुठा समाज अधिवेशन श्रीमान पं. जयनारायणजी रा. शर्मा मालेगांव की अध्यक्षता में सुयारुरुप से निर्विघ्न सम्पन्न हुआ । इस स्वागताध्यक्ष के रुपमें श्री कन्हैय्यालालजी जेठमलजी (नगर) ने कार्यभार संभाला 

इस जनसभा की विशेषता रही की इस अधिवेशन में महाराष्ट्र ही नही अपितु सुदुर प्रांत-आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटका, राजस्थान, गुजरात आदि प्रांतो के गणमान्यों की उपस्थिती में धार्मिक एवं सामाजिक प्रबोधन शिक्षा का प्रसार एवं प्रचार, आर्थिक एवं आध्यात्मिक उन्नति आदि विषयों पर विद्वत जनों के उद्बोधन एवं प्रबोधन के साथ निर्मलता से सम्पन्न हुआ इसी अधिवेशन में अॅडहॉक बॉडी गठित कर श्रीमान पं. जयनारायणजी को इस बॉडी का सभापती एवं संयोजक पद का भार सौंपा गया इसके साथ ही संबैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करनेकी भी जुम्मेदारी आप पर सौंपी गयी । प्रबोधन उद्बोधन खुली चर्चा आदि के साथही अनेक समाजोपयोगी प्रस्ताव भी पारित किये गये ।

इस सभामें “बंधू” प्रकाशक पं. शिवनाराणजी उदयपुर ज्योतिष पं. बिहारीलालजी श्रीमान प्रमोदजी “बंधू” मुंवअ, भवानीशंकरजी बंगलोर श्री प्रेम सुखजी भद्रावती आदी आदी मान्यवर उपस्थित थे ।

सभाका प्रथम अधिवेशन दि. १३-१४-१५ अगस्त १९६६ को शिवनाथनगर मालेगांव ( नाशिक ) में संवैधानिक प्रक्रिया से पूर्ण स्थापित महाराष्ट्र राज्य शाकद्वीपीय

 

सुविद्य शांतीलालजी मिसर

ब्राह्मण सभा की प्रथम अधिवेशन परमपूज्य धर्मनिष्ठ सम्मानिय पं. हुकुमचंदजी महाराज की अध्यक्षता में गणमान्यों एवं विद्वतजनो समाज बांधवों की उपस्थिति में निर्मलता के साथ सम्पन्न हुआ इस सम्मेलन में भी प्रबोधन उद्बोधन आदी के लिये मान्यवर जानकार विद्वतजनों की उपस्थिती थी इसमें समाज, सामाजिक इतिहास संस्कार, अर्थ, शिक्षण आदी विषयों पर समृद्ध एवं विषय बद्ध चर्चा हुआ खुलामंच प्रदर्शनी एवं मनोरंजन कार्यक्रम भी इस सम्मेलन का एवं महत्वपूर्ण अंग रहा |

अॅडहॉक बॉडी के सभापती एवं संयोजक श्रीमान पं जयनारायणजी शर्मा ने नियमावली आदी सवैधानिक दस्तावेज सभा के सामने रखा, जिसे ध्वनी मत से पारित किया गया और पंजिकरण प्रक्रिया पूर्ण करने हेतु आदेश दिया। सभाके अंतिम चरण में नियमानुसार चुनाव प्रक्रिया पूर्ण की गयी और सभापती (ट्रस्टमंडल) के लिये श्रीमान शांतीलालजी मिसर, चार्टर्ड अकौंटंट मुंबसी तथा कार्यकारिणी अध्यक्षपदके लिये पं. जयनारायणजी शर्मा मालेगांव समाज श्रेष्टी द्वयों का सर्वानुमते ध्वनी मत से निर्वाचन किया ।

म.रा.शा. बा. सभा मालेगांव के प्रथम पदाधिकारीयों में उपसभापती श्रीरामन शिवराजश्री सेवक नागपुर, उपाध्यक्ष श्रीमान नथमलजी शर्मा नागपुर, मंत्री पद के लिये श्रीमान गजाननजी कौशिक जलगांव, तथा सहमंत्री श्रीमान रतनलालजी शर्मा फत्तेपुर कोषाध्यक्ष मोहनलालजी रामचंद्रजी शर्मा मालेगांव थे। अधिवेशन पश्चात इस मंडलके एक सामाजिक हलचल पैदा कर लोगों मे समाज चर्चा का विषय बना दिया। अब समाज मे रिति-रिवाज ओसर मोसर, फिजुल खर्चा आदीपर सामुहिक चर्चा होने लगी, समाज परिवर्तन की लहर आगे बढ़ने लगी ।

सामाजिक संवेदना की उत्पत्तिही समाजोन्नती का पहला चरण है। जो शुरु हो गया था। पं. जयनारायणजीने अपने सहयोगीयो सह ओसर मोसर प्रथाबंदी दस्सा-बिस्सा भेद मिटाना, फिजूल खर्ची निर्बन्ध, विधवा पुन: विवाह सह शैक्षणिक एवं साहित्यिक जागरण के रुप मे अनेक सराहनिय कार्य किये। उनके कार्यों के लिये समाज उन्हे

सदैव स्मरण करता रहेगा ।

प्रथम सभा कार्यकाल समाप्ती के पश्चात म.रा.शा.बा. सभा का अगला अधिवेशन परभणी जिले के जिंतुर तालुका स्थित प्रसिद्ध श्रीक्षेत्र चारठाणा जहां सम्मानिय धर्म-पिठाधिपती पं. हुकुमचंदजी महाराज का पीठ स्थान है पर त्रिदिवसीय १-२-३, १९७० को श्रीमान सुविद्य शांतीलालजी मिसर सी. ए. सभापती म.रा.शा.ब्रा. सभा मालेगांव की अध्यक्षता में शांतीपूर्ण वातावरण में परंपरागत रुप मे सम्पन्न हुआ । श्रीमान फुलचंदजी सेवक आर्टिस्ट मुंबई को इस सभा के कार्यकारिणी अध्यक्ष के रुप मे निर्वाचित किया गया । तथा सभापती पद के लिये श्री शांतीलालजी मिसर थे ही । चारठाणा अधिवेशन के पश्चात १९८० में कालबादेवी, मुंवसी स्थित पंचायतवाडी में सभा का ३ रा अधिवेशन आयोजित किया गया। जो सभापती श्रीमान शांतीलालजी मिसर सी. ए. के अध्यक्षता में सुचारु रुप से सम्पन्न हुआ इसमें श्रीमान फूलचंदजी सेवक तथा श्रीमान सुविद्य शांतीलालजी मिसर (सभापती) महोदयों ने नवनिर्वाचित, सभापती श्री गजाननजी कौशिक जलगांव तथा रतनलालजी शर्मा (अध्यक्ष कार्यकारिणी) फतेपुर को चार्ज सौंपकर निवृत्त हुआ

 

अब सभापती म.रा.शा.बा. के रुप में श्रीमान गजाननजी कौशिक जलगांव ने एक अनुभवी ज्येष्ठ समाज सेवक के रुप में कमान संभाली थी ।

किसी कारणवश अध्यक्ष श्रीमान रतनलालजी शर्मा फत्तेपुर सुरुसेही सक्रिय नहीं हो सके। खैर सामाजिक कार्य है अपनी ही गति से समयानुकुल चलता है इसी संदर्भ में पं. गजाननजी कौशीक (सभापती म.र.शा.ब्रा.सभा जलगांव तथा सहयोगीयोंने दि. अक्तूबर (७-८) १९९० दो दिवसीय अधिवेशन का आयोजन किया गया। परंपरागत रुप से पूजा अर्चा, उद्घाटन, परिचय, प्रबोधन, चर्चासत्र आदी कार्य भी पूर्ण किये गये । आरोप प्रत्यारोप मतभेदों के अनंतर सभा की बागडोर नव तरुणों के हाथों सौंपी गयी । इस सभाने श्रीमान ॲड. इदरचंदजी शर्मा पूणे को सभापती (ट्रस्ट मंडल) पद के लिये तथा डॉ. शांतीलालजी शर्मा लातुर को अध्यक्ष कार्यकारिणी के रुप में निर्वाचित किया ये सब तो हुआ अधिवेशन भी अधिवेशन की तरह

सम्पन्न हुआ । सारे कार्य विधिवत हुआ परंतु ज्येष्ठ समाजसेवी पं. गजाननजी कौशिक की ‘खंत’ उनके द्वारा प्रेषित ‘स्मारिका’ १९९०

में स्पष्ट रूप से उभर कर आयी ।

नव तरुणों के नेतृत्व में सामाजिक जागरण बढेगा । नवचैतन्य एवं परिवर्तन दिखाई देगा । शायद इसी सोच को लेकर सभा ने म.रा.शा.ब्रा. सभा

 

डॉ. शांतीलालजी शर्मा

की बागडोर श्रीमान अँड. इन्दरचंदजी शर्मा पुणे तथा डॉ. शांतीलालजी शर्मा लातुर के हाथों सौपी गयी थी । परंतु कालांतर में अध्यक्ष का. का. डॉ. शांतीलालजी अन्यान्य कारण से अपना राजीनामा प्रस्तुत कर निवृत्त हो गये । तथा कुछ कालोपरांत अॅड. इन्दरचंदजी शर्मा सभापती महोदय ने भी प्रकृति स्वास्थ कारण हेतु अपना राजीनामा सभा ने उपसभापती महोदय श्रीमान बद्रीनाथजी शर्मा फागणा के नेतृत्व में निर्धारित समयांतर्गत लोकनिधी जमाकर दि. २७ अक्तुबर १९९६ रविवार को एकदिवसीय अधिवेशन की रचना कर आयोजन किया। सुबह सूर्यपूजा, आराधना, उद्घाटन, परिचय, सत्कार अहवाल लेखाजोखा आदी के साथही प्रमुख अतिथीओं द्वारा प्रबोधन भोजन एवं दोपहर में चर्चासत्र के साथ गतिरोधों के अनन्तर भी चुनावी प्रक्रिया पूर्ण कर उपस्थित ट्रस्ट समाज बन्धुओं द्वारा निर्वाचीत सभापती श्रीमान पं. हरेकृष्णजी शर्मा मालेगांव तथा अध्यक्ष (कार्यकारिणी) श्रीमान गोपीकिसनजी शर्मा मनमाड का तालियों की गडगडाहट में प्रमुख अतिथी द्वारा सत्कार किया गया। कई प्रस्तावों पर चर्चा हुआ और प्रस्ताव भी पारित हुअ परंतुसबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव जिसमें एक स्तरिय सदस्यता की बात कही गयी थी (आजिवन सदस्यता) ध्वनी मत से स्विकार किया और शायद यही से परिवर्तन की धारा, की शुरुवात हुआ ।

प. हरेकृष्णजी शर्मा

श्रीमान हरेकृष्णजी शर्मा (मालेगांव) विश्वस्त मंडल के सभापती अर्थात इस मंडल के सर्वोच्च पद पर आसीन थे परंतु फिर भी आपने संस्था के उत्थान एवं

उन्नति के लिये स्वयंस्फुर्त गांव-गांव / शहर-शहर घुम कर समाज बांधत्तों से प्रत्यक्ष भेट लेकर आजीवन सदस्य बनाने का अभियान शुरु किया इस कार्य संपन्नता हेतु आपने सभा कार्यकारिणी के अध्यक्ष जो ट्रस्ट मंडल के पदासीन मंत्री होते है, वे श्रीमान गोपीकिशनजी नथमलजी शर्मा मनमाड अध्यक्ष कार्यकारिणी मंडल का सहयोग लिया

आपको इसमें सफलता भी मिली । अन्य कार्यों में विद्यार्थीयों / विद्यार्थिनियों को प्रोत्साहन पर पारितोषिक प्रदान करना निराधार महिला निधी सहाय वैद्यकिय सहाय आदि नियोजित योजनाओं को अपने कोष मर्यादा के अधिन रहकर कार्यान्वित करते रहे ।

२८ मे २००० को धूळे शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज के यजमानी में एक दिवसीय अधिवेशन विश्वस्त मंडल के सभापती श्रीमान हरेकृष्णजी शर्मा (मालेगांव) की अध्यक्षता में सुसम्पन्न हुआ सूर्य प्रतिमा की पूजा अर्चा के साथ ही उद्घाटन स्वागत सत्कारादी के पश्चात संस्थाकी अपनी बात, अहवाल, लेखा जोखा, मार्गदर्शन पर भाषण चर्चा आदि के साथ ही संस्था द्वारा विभीन्न क्षेत्रों से या विधाओं से जुडे हुओ समाजसेवी निधीदाता उद्यमी, व्यापारी, प्रथम मानांकीत व्यवसायिक (प्रोफेशनल्स) उदा. डॉक्टर, इंजिनिअर, वकील, चार्टर्ड ऐकाउंटंट आदी आदी के साथ ही व्यक्तिगत स्वरुप में अवार्ड प्राप्त समाज बान्धवों का सम्मान सत्कार कर समाज के प्रति कर्तव्य बोध दर्शाते हुओ । ‘सभा अपने आपको गौरवान्वीत महसुस करती है’ के साथ ही विद्यार्थीयों को भी पुरस्कृत किया गया ।

अधिवेशन का अर्थ चुनाव यही तक हम लोग रुके हओ है। अधिवेशन का सही अर्थ है मंडल अपने आपका मुल्यांकन कर समाज के सामने प्रस्तुत होते और स्वयं का आत्म विश्लेषण करे तथा समाज के जानी-मानी जनों के वैचारिक मार्गदर्शन पर अपनी सोच कायम कर अपने कदम बढाये अर्थात अधिवेशन यह सभा और सदस्य या सभा और समाज के संभाषण का माध्यम स्थान है। सुबह से हो व्यक्तिगत सामाजिक एवं अन्य प्रकार के मतभेद सभा पर हावी रहे। परंतु दोपहर पश्चात इसे विराम मिला। और पारितोषिक स्वागत सत्कार जैसे कार्यक्रम तालियों की गड गडाहट के साथ सम्पन्न हुने । बाहर से पधारे हुओ अतिथीगणों विशिष्ट मेहमानों एवं महिलाओंने उच्चस्तरिय विचार प्रस्तुत किये । प्रस्तावों पर विचार कर पारित किया गया।

 

समाज में मत भेद हो सकते है या हो हरकत नही, भेद नही होना चाहिये की चर्चा के साथ अधिवेशन सुसंपन्न हुआ । निर्धारित योजनाओं अंतर्गत शैक्षणिक सहायता, • निराधार सहाय्यक योजना एवं सामुहिक कार्य योजनाओं तथा प्रकाशन को पूर्ण रुपेन न सही भागशाः अपनी आर्थिक मर्यादाओं के अधिन रह कर क्रियान्वित करते रहना ही भी एक उपलब्धी ही कही जाएगी। इन्ही तरह नियमित बैठको के दौर के चलते श्रीमान गोपीकिसनजी नथमलजी शर्मा (मनमाड) ने अपने अध्यक्ष पद का राजीनामा पत्र दिया। सभी के समझाने के बावजूद आप तय्यार न होने से सभा ने आपका राजीनामा स्विकार कर लिया। नियमानुसार उपाध्यक्ष ताराचंदजी महोदयको अध्यक्षपद का कार्यभार सौंपा गया ।

 

सभा कार्यक्रम अजिवन सदस्य के रुप में चारसौ से अधिक आजीवन सदस्य बनाने में सफल रही और प्रयास से संख्या और अधिक होने में देर नही लगेगी ।

Malegaon adhiveshan 13 14 15 aug 1966

मालेगांव अधिवेशन दि. १३,१४,१५ ऑगस्ट १९६६ सभा पदाधिकारी सदस्यगण एवं समाज दर्शन

आनेवाले २० फरवरी २००५ को म.रा.शा.ब्रा. सभा की सर्वसाधारण सभा का आयोजन श्रीमान हरेकृष्णजी शर्मा (मालेगांव) आपकी अध्यक्षता में होने जा रही है। जिसके सफलतम संपन्नता हम सभी भुवन भास्कर भगवाद सूर्यनारायण से सभा के निर्विघ्न संपन्नता की प्रार्थना करते है ।

धुळे अधिवेशन २८ मे २००० पं. जयनारायणजी शर्मा स्टेज पर सभापती पं. हरेकृष्णजी शर्मा, प्रमुख अतिथी पं. गजाननजी कौशिक, पं. अमरनाथजी शर्मा अध्यक्ष पं. गोपीकिशनजी शर्मा एवं उपसभापती गोपीकिशनजी मालेगांव तथा प्रमुख अतिथी कुवेराजी । तथा अधिवेशन में उपस्थित समाज महिला-पुरुष

अधिवेशनमें संबोधन करते हुए गोपीकिशनजी शर्मा मनमाड और स्टेज पर विराजमान सभापती हरेकृष्णजी शर्मा, उपसभापती गोपीकिशनजी मालेगांव, प्रमुख अतिथी अमरनाथजी इंदौर, तथा श्री कुबेराजी राजस्थान